डाक्टर रजनी कांत दत्ता
पूर्व विधायक

विश्वासघात कर जो विश्वासघात को कूटनीति समझता है, वह इतना बड़ा नीच होता है कि,उसे परिभाषित करने के लिए निकृष्ट शब्द भी अति निकृष्ट हो जाते हैं।

एक बहुत बड़ा घड़ियाल था।उसके भतीजे की दोस्ती एक नाविक से हुई,जो यात्रियों को नदी पार कराया करता था। उस नदी के ऊपर एक बहुत बड़ा बांध और उससे संबंधित जलाशय था।बरसात का मौसम था और उसका दोस्त बाढ़ आई हुई नदी में यात्रियों को लेकर उस पार जा रहा था। उसे मालूम था कि बांध के जलाशय में जरूर अधिक से अधिक पानी एकत्र हो गया है।उसे यह भी मालूम था कि,लगभग रोज की तरह इसी वक्त उसका दोस्त यात्रियों को लेकर नदी पार कर रहा होगा। तभी बांध का फाटक खोला जाएगा और नाव डूबने लगेगी। हुआ भी ऐसा ही योजना के अनुसार उसका चाचा जो एक बहुत विशाल घड़ियाल था।उससे उसने कहा कि,इस रास्ते से नाव जाती है जब नाव डूबने लगे तो वहां स्थिर होकर रुक जाना था कि तुम्हारी पीठ एक टापू की तरह दिखे।जब नाव डूबने लगी तो वह अपने मित्र नाविक से आकर बोला कि, वो देखो अचानक सामने एक टापू दिख रहा है।वहां तैर के पहुंच जाओ सभी लोग सुरक्षित हो जाओगे।जब सभी टापू पर पहुंच गए बाँध कुछ स्थित हुआ। तो घड़ियाल ने गोता मारा और जितने लोग दोस्त नाविक के साथ बैठे हुए थे।उसे चाचा घड़ियाल मारकर खा गया।इस घटना के संबंध में कभी लिखित कविता उद्धृत कर रहा हूं-

“आपातकाल में भ्रमित हो मित्र के कहने पर जिसे हमने समझा था टापू, वक्त आने पर वह घड़ियाल की पीठ निकला”

चाचा का त्रिदलीय गठबंधन और भतीजे का सहयोग।

वाह रे,घड़ियाल चाचा!
वाह रे, घड़ियाल भतीजा! कहते हैं कि जब करोड़ों कमीने मरते हैं और उनकी खाल से बढ़कर जो ढोल बनता है।उसे बजाओ तो केवल एक ही आवाज निकलती है विश्वासघाती, विश्वासघाती, विश्वासघाती।

इस लेख का किसी प्रदेश की राजनीति से मतलब नहीं है

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