सोनिया के लिए काला दिन

नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन विधेयक राज्यसभा से भी पास हो गया है। आज बुधवार को राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पर चर्चा की गई। इससे पहले नागरिकता संशोधन विधेयक को सेलेक्ट कमिटी को भेजा जाए या नहीं, इस प्रस्ताव पर राज्यसभा में वोटिंग हुई जिसमें इस बिल को सेलेक्ट कमिटी में भेजने का विपक्ष का प्रस्ताव गिर गया। इस दौरान शिवसेना ने सदन से वॉकआउट कर दिया और वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। बता दें कि सोमवार नौ दिसम्बर को लोकसभा ने भी इस विधेयक पारित कर दिया था।

राज्यसभा में आज विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नागरिकता बिल कभी न लाना पड़ता, ये कभी संसद में न आता, अगर भारत का बंटवारा न हुआ होता। बंटवारे के बाद जो परिस्थितियां आईं, उनके समाधान के लिए मैं ये बिल आज लाया हूं। पिछली सरकारें समाधान लाईं होती तो भी ये बिल न लाना होता। कांग्रेस की सोच पर मुस्लिम शब्द चिपक गया है।

शाह ने कहा, ”हमारे पास 5 साल के लिए बहुमत है, हम भी चाहते तो बाकी की सरकारों की तरह काम कर लेते, लेकिन मोदी सरकार देश की स्थिति को सुधारने के लिए आई है। हम देश की समस्याओं को सुलझाने के लिए सत्ता में आए हैं। अगर देश का विभाजन न हुआ होता और धर्म के आधार पर न हुआ होता तो हमें आज यह बिल लेकर आने की जरूरत नहीं पड़ती। लाखों लोग आज चीत्कार-चीत्कार कर कहते हैं कि मेरे साथ अन्याय हुआ है।”

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिल पारित होने पर खुशी जताते हुए आज का दिन ऐतिहासिक बताया। उन्होंने बिल का समर्थन करने वाले सांसदों का आभार व्यक्त करते हुए उनको धन्यवाद दिया।

काग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने राज्यसभा मे बिल पारित होने को काला दिन बताया। आज बिल पारित होने से अब पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसम्बर 2014 भारत मे शरण लेने वाले हिन्दू, सिख, इसाई, पारसी, बौद्ध और जैन मतावलम्बी भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के अधिकारी बन गए।

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