मग़रिब की नमाज़ के साथ गूंजी मानस की चौपाइयां और दोहे

स्थान – लाटभैरव मंदिर और लाट की मस्जिद का चबूतरा। समय शाम के साढ़े पांच बजे। दृश्य – एक तरफ अजान हो रही है तो दूसरी और ढोलक और मजीरे के थाप के बीच नारद मुनि नारायण… नारायण का स्वर मुखर कर रहे है। चबूतरे के पूर्वी हिस्से में रामचरित मानस की चौपाई ‘सीता चरण चोंच हति भागा,मूढ़ मंदमति कारन कागा’ मुखर हो रही है और चबूतरे के पश्चिमी हिस्से में पांचों वक्त के नमाजी अल्लाह पाक का कलाम पढ़ रहे है। नमाज से पहले शुरू हुई रामलीला नमाज के बाद भी जारी रही। नमाज से पहले और बाद में मुस्लिम बन्धुओं ने भी दर्शक के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। काशी के इतिहास में 476वां मौका था जब भगवान श्री राम की लीला और अल्लाह पाक की इबादत एक साथ हुई। गोस्वामी तुलसीदास के मित्र मेघा भगत द्वारा शुरू की गई जयंत नेत्र भंग की लीला इसी स्थान पर होती आ रही है।

आरती से लीला को विराम

रामलीला के आरम्भ में देवराज इंद्र का पुत्र जयंत कौआ बनकर माता सीता के चरण में चोंच मारकर भागा। यह देख श्री राम ने सींक के बाण का संघान किया। रक्षा के लिए जयंत अपने पिता इंद्र, ब्रह्मा और शिव के पास गया लेकिन सभी ने उसकी रक्षा करने में असमर्थता जता दी। अंततः नारद मुनि के सलाह पर जयंत श्री राम के चरणों में आकर गिर पड़ा। अनुसुइया मिलन, मतंग ऋषि के आश्रम प्रवेश, गिद्ध राज से भेंट करते हुए प्रभु पंचवटी पहुंचे। रामलीला समिति के अध्यक्ष डॉ.राम अवतार पांडेय और प्रधानमंत्री कन्हैया लाल यादव ने देव स्वरूपों की आरती की।

हिन्दुस्तान की खूबसूरती है इसकी गंगा-जमुनी तहज़ीब

लाटभैरव फर्श पर एक साथ नमाज़ व रामलीला का मंचन होने के दौरान आदमपुर थाना प्रभारी सतीश कुमार सिंह सदल बल डटे रहे। इंस्पेक्टर सतीश ने नेशन-टुडे से बात करते हुए बताया कि अपने पूरे पुलिस सेवा की ड्यूटी के उपरांत ऐसी गंगा-जमुनी तहजीब नहीं देखने को मिली।

हिंदुस्तान की खूबसूरती है इसकी गंगा-जमुनी तहजीब। अनेकता में एकता और आपसी भाईचारा। हालांकि, आजकल इसी खूबसूरती को खत्म करने में भी कुछ लोग लगे हुए हैं। लेकिन ऐसी मिसालें हैं जो उम्मीद जगाती हैं और जिन्हें देखकर ये लगता है कि जो ताना-बाना इस देश में आपसी भाईचारे का है वो इतनी आसानी से टूटने वाला नहीं है।

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